Two Line Short Shayari

कुछ भी बचा ना कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिए रात हो गई

सब कर लेना लम्हें ज़ाया मत करना
गलत जगह पर जज़्बे ज़ाया मत करना।

जब हम नज़र ना आएं तो मत घबराना तुम,
कुछ दिन आसूं बहाकर किसी और के हो जाना तुम।

मेरी उदासियां तुम्हे कैसे नजर आएंगी
तुम्हे देखकर तो हम मुस्कुराने लगते हैं

शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते हैं,
इतने समझौतों पर जीते हैं कि मर जाते हैं

कुछ टूटे हैं ख़्वाब मेरे कुछ को अब भी बुन रहा
जो उठ रही आवाज़ें मुझ पर उनको भी सुन रहा

तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक है
मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक है

सारी दुनिया से मुलाकातें एक तरफ
तेरे साथ बैठना तुझे देखना एक तरफ़

क्या फ़र्क पड़ता है असल में हम कैसे हैं,
जिसने जैसी सोच बना ली उसके लिए हम वैसे हैं

न रूठने का डर न मनाने की कोशिश
दिल से उतरे हुए लोगों से शिकायतें कैसी